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आज का टॉपिक है टाइफाइड बार-बार क्यों होता है आपने सुना होगा कि कई लोग कहते हैं कि मुझे हर साल तीन चार बार टाइफाइड हो जाता है या मैं अभी पिछले महीने एक की दवाई की थी लेकिन दोबारा जांच कराई। उसमें फिर टाइफाइड आ गया है





टाइफाइड बार बार क्यों होता है और इसका क्या कारण है। ये सब इसमें डिटेल में बताया जाएगा।





यह टाइफाइड एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है जोकि Salmonella Typhi नाम के बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बैक्टीरिया Contaminated फूड एंड वाटर से फैलता है अर्थात दूषित खाने पीने की वस्तुओं के खाने से यह फैलता है। जो वस्तुएं खुले में पड़ी होती हैं उनको नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह जाकर उनमें पाया जाता है।





जैसे चाट, पकौड़ी, टिक्की, ये जो खुले में पड़ी वस्तुएं हैं ये इसको फैलाने में सहायक होती हैं।





इनके फैलने का तरीका Foecal Oral Route होता है अर्थात कई लोग जो खुले खेतों में जाकर शौच करते हैं अगर उनके मल में यह बैक्टीरिया हुआ तो यह बैक्टीरिया उस मिट्टी में मिल जाता है और उस मिट्टी में उगी हुई कोई भी वस्तु अगर खाने पीने वाली है उसको अगर हम खाते हैं तो यह बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसलिए अगर कोई फल या सब्जियां खाते हैं उसको पहले अच्छी प्रकार से धोना चाहिए ताकि इस प्रकार की न हो।





टाइफाइड के लक्षण





  • बुखार होना
  • शरीर में दर्द
  • भूख कम लगना
  • कमजोरी महसूस होना








  1. बुखार होना और ये बुखार आमतौर पर शाम के समय ज्यादा होता है और सुबह पर आपको समय या बहुत कम हो जाता है।
  2. शरीर में दर्द रहता है तो यह दर्द हर समय थोड़ा बहुत होता ही रहता है। रोगी की भूख कम हो जाती है तथा ना कुछ खाने से उसके अंदर कमजोरी लगातार बढ़ती रहती है। उसको थोड़ा सा भी काम करने पर बहुत ज्यादा थकावट हो जाती है।




टाइफाइड लेबोरेटरी टेस्ट





  1. लेबोरेटरी टेस्ट की तो सबसे पहले जो बेसिक टेस्ट आता है वो है विडाल। यह टेस्ट एक एंटीबॉडी टैस्ट होता है। इसका मतलब होता है कि जब कभी यह बैक्टीरिया हमारे शरीर में एंटर करता है तो हमारे शरीर में उसके अगेंस्ट एंटीबॉडीज बन जाते हैं। उसी को ये जांचने का टेस्ट है जिसको विडाल बोलते हैं लेकिन ये विडाल टेस्ट एक बार पॉजिटिव जाने के बाद इसको ब्लड में जाने में तकरीबन 2 से 4 महीने तक लग जाते हैं इसलिए कई बार मरीज इसका इलाज करने के बाद दोबारा टेस्ट कराते हैं तो वो पॉजिटिव आता है
  2. दूसरा टेस्ट है। यह Typhidot Test रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट है जिसमें IGG और IGM को देखते हैं। अगर इसमें से IGG पॉजिटिव आए तो इसका मतलब होता है कि टाइफाइड 6 से 7 दिन पुराना है और अगर IGM पॉजिटिव आए तो इसका मतलब है टाइफाइड अभी 2 से 3 दिन पुराना है और अगर ये दोनों ही पॉजिटिव हैं इसका मतलब है कि टाइफाइड पुराना है।








इसके अलावा हम मरीज का मल अर्थात् स्टूल टेस्ट करके देखते हैं। अगर उसमें बैक्टीरिया पाया जाता है तो पेशेंट इसका कैरियर कहलाता है अर्थात उसको इसके लक्षण तो नहीं हैं पर यह फैलाने में मदद कर रहे हैं।





ट्रीटमेंट





इसमें डॉक्टर आपको आपकी रिपोर्ट के मुताबिक एंटीबायटिक्स देता है जिसका कोर्स 10 दिन से लेकर 15 या 16 दिन तक होता है और कई बार कई पेशंट के अंदर इसको तीन या चार हफ्ते तक भी देना पड़ता है।





दोस्तो एंटीबायटिक्स का सही मैथड तो यह है कि जब आपके स्टूल में इस टेस्ट का बैक्टीरिया नेगेटिव नहीं हो जाता है तब तक एंटीबायटिक्स को खाते रहना चाहिए नहीं तो ये दोबारा बारबर हो जाता हैं। क्योंकि कुछेक बैक्टीरिया अगर अंदर रह जाएं तो फिर से ग्रो करके फिर से टाइफाइड को पैदा कर देते हैं।





टाइफाइड के मरीज को क्या खाना चाहिए





मरीज को ताजे फल या जूस पीते रहना चाहिए ताकि कमजोरी ज्यादा न हो। इसके साथ ही हल्का भोजन जैसे खिचड़ी दलिया मूंग की दाल ऐसे हल्के चीजों को खाते रहना चाहिए।





इसके अलावा हम टाइफाइड से बचने के लिए पहले सही वैक्सीन ले सकते हैं जोकि हमें बार बार टाइफाइड होने से बचाकर रखती है और इस वैक्सीन का असर एक से तीन साल तक रहता है। डिफेंडिंग ऑन द वैक्सीन नेचर।





आशा करता हूं कि आपके सारे डाउट्स क्लियर हो चुके होंगे। अगर फिर भी कोई सवाल रह गया हो तो कमेंट में उसे पूछ सकते हैं


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