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Satta Matka Aur Satta Matka Kya hai : दोस्तो जो लोग मेहनत करने से कतराते हैं वही लोग ज्यादा पैसा कमाने के लिए शॉर्टकट ढूंढते हैं जिसमें से एक सट्टा मटका नाम का जुआ है जो भारत में काफी चर्चित है। गैर कानूनी होने के बावजूद भी इस जुए को लोग सरकार से छिपाकर बड़े पैमाने पर भारत में खेल रहे हैं। सट्टा मटका एक तरह का रिस्क है। अगर जीत जाते हैं तो फायदा काफी ज्यादा होता है जिसकी वजह से लोग इसकी ओर आकर्षित होते हैं। 





सट्टा मटका की शुरुआत कब हुई थी 





दोस्तो चलिए आपको बताते हैं कि सट्टा मटका की शुरुआत कब से हुई दोस्तो जानकारों की मानें तो सट्टा मटका की शुरूआत भारत में आजादी से पहले हुई थी लेकिन उस जमाने में इस खेल को पारंपरिक तौर पर खेला जाता था लेकिन जमाना अभी बदल चुका है। सट्टा मटका ने टेक्नोलॉजी की शकल ले ली है जिससे इसको खेलना बेहद आसान हो चला है। 





इस जुए का नाम सट्टा मटका क्यों है





अब आप सोच रहे होंगे कि इस जुए का नाम सट्टा मटका क्यों है। एक जमाने में सट्टे मटके को खेलने के लिए मटके के अंदर पर्चियां डाली जाती थी और नंबर निकाले जाते थे उस समय कॉटन के दाम पर सट्टा खेला जाता था। न्यू यॉर्क कॉटन एक्सचेंज से डेली प्रिंटर के जरिए बॉम्बे कॉटन एक्सटेंड भेजा जाता था। वहीं कॉटन के शुरू होने और बंद होने के नाम पर सट्टा खेला जाता था। 





अब ये पुराना तरीका एक नए सिरे से खेला जा रहे सट्टे मटके को कई वेबसाइट और ऐप के जरिये भी खेला जाता है। इसमें सबसे पहले आपको कई नंबर्स में से किसी एक नंबर को चुनना होता है और उस पर पैसा लगाना होता है। अगर आपका सही नंबर लग जाता है तो आप जीत कर सट्टा किंग बन जाते हैं और उसके बदले आपको काफी बड़ी रकम में पैसा मिलता है। 





Satta Matka क्या है
Satta Matka क्या है




भारत में भले ही इसे खुले तौर पर न खेला जाता हो लेकिन बड़े पैमाने पर इसका बिजनेस है। वैसे तो भारत में कई सट्टा मटका गेम हैं लेकिन सबसे फेमस कल्याण और वर्ली सट्टा मटका है। 





वर्ली मटका की शुरुआत गुजरात के किसान कल्याण जी भगत ने 1992 में की थे। ये सट्टा सातों दिन चलता है जिसका मतलब है सातों दिन। इस गेम पर सट्टा लगाया जा सकता है 





लेकिन 1964 में रतन खत्री ने न्यू वर्ली नाम के सट्टा मटका की शुरुआत की। भले ही इस गेम में कुछ परिवर्तन किए गए मगर ये गेम सिर्फ हफ्ते में चार दिन ही खेला जाता है। 





वहीं इस आधुनिक मटके बिजनेस को ऑनलाइन खेला जाता है। इसका मुख्य केंद्र महाराष्ट्र के आसपास का इलाका है। जुआ खेलना बेहद रिस्की है लेकिन फिर भी भारत में इसे बड़े ही चाव से खेलते हैं। 





अगर लक काम कर गया तो मालामाल और अगर किस्मत ने धोखा दे दिया तो कोई भी सड़क पर भी आ सकता है। इस तरह के गेम खेलने से कई धनवान लोगों का भी दिवाला निकल चुका है 





लेकिन सट्टा स्वास्थ्य के लिए भी बेहद हानिकारक है। जो लोग इस सट्टे को खेलते हैं उन्हें सदमा और मानसिक चिंता लगी रहती है। उन लोगों के बर्ताव में भी चिड़चिड़ापन आ जाता है। जो लोग इस सट्टे को बर्दाश्त नहीं कर पाते वो लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं। आप ज्यादा धन प्राप्त करने के लिए सट्टे जैसे रास्ते अपनाते हैं तो आपका जीवन दुखों का सागर बन जाता है क्योंकि  इस सट्टा में लोगों की जिंदगी का तबाह होना बड़ी ही आम बात है। 


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