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Indian Aircraft MIG-25 की कहानी: 27 मई 1997। आसमान में लगातार धमाकों की आवाज सुनकर इस्लामाबाद के कई निवासी सदमे में अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि कुछ भी नहीं देखा जा सका लेकिन उनमें से तो बहुत लोग समझ गए कि यह आवाज क्या थी। यह एक सुपर सोनिक विमान द्वारा उत्पन्न सुपर सोनिक बूम था जो तब होता है जब विमान ध्वनि की रफ्तार को पार करता जाता है। 









इस आवाज का स्रोत भारतीय वायुसेना का एक MiG-25 विमान था जिसे पाकिस्तान की गुप्त निगरानी के लिए तैनात किया गया था। उस दिन मिशन से वापस लौटते समय विमान के सुपरसोनिक गति से प्रवेश होने की आवाज सुनकर लोग चौंक गए। 





पाकिस्तानी सरकार को पता





यह पहली बार नहीं था जब भारतीय MiG-25 विमान द्वारा पाकिस्तान पर गुप्त निगरानी की गई हो लेकिन यह पहली बार था जब पाकिस्तान की आम जनता को इसके बारे में पता चल गया। हालांकि पाकिस्तानी सरकार को पता था कि भारत के पास यह विमान है लेकिन उन्हें यह बात गुप्त रखने के लिए मजबूर होना पड़ा। 









MiG-25 की उत्पत्ति





कई प्रतिष्ठित हत्यारों की तरह MiG-25 की उत्पत्ति का कारण भी शीतयुद्ध ही था। 1950 के दशक में सोवियत यूनियन पर लगातार निगरानी रखने के लिए अमेरिका ने अपने जासूसी विमान LOCKHEED U-2 को तैनात किया था









क्योंकि यह विमान 70 हजार फीट की उंचाई पर उड़ता था। कोई भी सोवियत फाइटर जेट इस विमान के पास भी नहीं पहुंच पाता था। हालांकि पचास के दशक के उत्तरार्ध में यह स्थिति समाप्त हो गई क्योंकि सोवियत संघ ने सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें विकसित की। यूएसएसआर के एक U-2 विमान को भी मार गिराया गया। 









हालांकि यूएसएसआर जानता था कि अमेरिकी जेट द्वारा उत्पन्न खतरे का पूरी तरह से मुकाबला करने के लिए उन्हें उस ऊंचाई पर काम करने में सक्षम इंटरसेप्टर जेट विकसित करना होगा। इसका उद्देश्य एक ऐसे का निर्माण करना था जो न केवल अमेरिकी जासूसी विमानों का मुकाबला कर सके बल्कि अन्य हाई एल्टीट्यूड वाले B-52 और B-58 जैसे बमवर्षक का भी मुकाबला कर सके। फिर उन्होंने ऐसा विमान बनाया और 1970 से यह सोवियत सेना का हिस्सा बन गया। इस विमान की विशेषता सुपरसोनिक स्पीड और हाई सर्विस सीलिंग थी। MiG-25 के पास पारंपरिक लड़ाकू विमानों के मुताबिक सुरक्षा नहीं थी लेकिन उस समय कोई अन्य विमान नहीं था जो इतनी उंचाई पर इतनी तेजी से यात्रा कर सके। 









अमेरिका की मिसाइलें भी मुकाबला नहीं कर सकीं





नतीजतन अमेरिका की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी मुकाबला नहीं कर सकीं। यह सर्विलेंस और बॉम्बिंग के लिए भी बेहतरीन थे। वे अपने पंखों में 500 किलो तक के छह बम ले जा सकते थे। लेकिन सच तो ये था कि 60 हजार फीट से अधिक की उचाई से 2.5 मैक की रफ्तार से उड़ने वाले विमान से यदि वो सामने बम गिरा तो वह अपने निर्धारित लक्ष्य से कई किलोमीटर दूर ही गिरेगा। 









अमेरिका और नाटो भी नहीं समझ पाया





सोवियत संघ ने बाद में MiG-25 को अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी इसमें जोड़ी। सोवियत संघ ने शक्तिशाली विमान के अस्तित्व को गुप्त रखा था। अमेरिका और नाटो ने MiG-25 की विशेषताओं को समझने की पूरी कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। 









उन्होंने इस रहस्यमय विमान को फॉक्स बैट उपनाम दिया। इसे एक मल्टी रोल फाइटर समझकर अमेरिका ने अपनी F-15  योजना को भी तेज कर दिया। 





MiG-25 हाईजैक









अमेरिका को इसका असली मकसद तभी समझ में आया जब एक सोवियत पायलट ने MiG-25 को हाईजैक कर लिया और जापान भाग गया। MiG-25 विमान की क्षमताओं के बारे में जानने के बाद अमेरिका को अपने आगामी हाई एल्टीट्यूड बॉम्बर जैसे कई परियोजनाओं को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। 





भारत ने MiG-25 को खरीदा





सोवियत यूनियन 1980 के दशक में भारत को MiG-25 की पेशकश की थी। भारत निगरानी के लिए जिन CANBERRA विमानों का इस्तेमाल कर रहा था वे पुराने हो चुके थे और दुश्मन उन्हें आसानी से ढूंढ सकता था। 









जासूसी उपग्रह भी उस समय भारतीय सेना के लिए एक दूर का सपना था इसलिए भारत ने सहर्ष सोवियत प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और 1981 में MiG-25 खरीदा। सौदा और विनिमय सभी बड़ी को गोपनीयता में किये गये थे। 









वही समय था भारत सोवियत यूनियन से सैकड़ों ANTONOV विमान प्राप्त किये थे। पश्चिमी पर्यवेक्षकों ने इसे भारत और सोवियत यूनियन के बीच एक और सैन्य सौदा माना था। लेकिन इन विमानों में MiG-25 के संघटक पार्ट भी थे। बाद में इन भागों को भारत में एकीकृत किया गया था। सौदे में भारत ने 10 MiG खरीदे जिसमें आठ सिंगल सीटर और दो ट्विन सीटर शामिल थे। 





MiG-25 को कहां रखा गया था





इन विमानों को उत्तरप्रदेश के बरेली में तैनात किया गया और भारत ने इनके लिए अंडरग्राउंड बेस भी बनाया। 









भारतीय वायुसेना के MiG-25 पाकिस्तान पर नजर रखे रहते थे पाकिस्‍तानी सेना और पाकिस्‍तानी प्रशासन इसके बारे में अच्छी प्रकार से जानते थे किन्तु उनके पास ऐसा कोई जेट विमान नहीं था जो मेक ट्रेड फेयर जितनी ऊंची उड़ान भर सकता था। इसलिए उन्हें जानकारी को अपने ही लोगों से गुप्त रखने के लिए मजबूर होना पड़ा था। लेकिन 1997 की सोनिक बूम वाली घटना ने पाकिस्तानी जनता के सामने सभी रहस्यों से पर्दा उठा दिया। 





भारत ने बाद में न केवल पाकिस्तान के आधिकारिक दावों का खंडन किया बल्कि यह मानने से इनकार कर दिया कि भारतीय विमान इस्लामाबाद की जासूसी कर रहा है। MiG-25 जैट विमान जो पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से पाकिस्तान पर अ ध्‍वनि गति से नजर रखे था अचानक उस दिन सुपरसोनिक स्पीड में कैसे चला गया उस दिन से लेकर आज तक यह प्रश्न अबूझ पहेली बन चुका है कहा जाता है कि विमान चालक ने पाकिस्तान की बेबसी पर से पर्दा उठाने के लिए जान कर ऐसा किया था।





MiG-25 1999 के कारगिल युद्घ





 1999 के कारगिल युद्घ के दौरान MiG-25 की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही थी। इसका प्रयोग बहुत ऊंचे ऊंचे पहाड़ों पर बनाए गए बंकरों में छिपे घुसपैठियों को खोजने और उन पर निगरानी रखने के लिए व्यापक रूप से किया जाता था। इसके बारह सौ मिलीमीटर कैमरों द्वारा खींची गई तस्वीरें दुश्मन के सटीक ठिकानों का पता लगाने में पूर्ण रूप से कारगर थी और फिर MIRAGE-2000 जेट विमानों का उपयोग करके दुश्मन के खुफिया ठिकानों पर बमबारी की गई बल्कि घुसपैठियों का पूरी तरह से सफाया भी कर दिया गया 









लेकिन शायद 2006 तक भारत को इन पुराने विमानों को सेवा से हटाना पड़ा। यह विमान न केवल काफी पुराने हो चुके थे बल्कि इनके पुर्जों की उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या थी। इनके पुर्जों को रूस से आयात करना पड़ता था। इन सभी बातों के मद्देनजर रखते हुए भारत ने स्वयं ही के निरीक्षण उपग्रहों का निर्माण करना शुरू कर दिया और निरीक्षण ड्रोन भी हासिल कर लिया। इस कारण से भारत ने MIG-31 के रूसी प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया जो MIG-25 का अद्यतन संस्करण था। आज इस सुपरसोनिक जासूसी विमान दिल्ली के पालम संग्रहालय में सार्वजनिक प्रदर्शन पर है। 





MIG-25 जैसे विमानों ने 25 वर्षों से भी अधिक समय तक निर्भीक होकर पाकिस्तान और तिब्बत पर न केवल खुफिया उड़ानें भरी बल्कि भारतीय सेना को कई खुफिया व महत्वपूर्ण जानकारियां भी उपलब्ध कराई। 





जय हिन्द।


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